
शिलाजीत का सेवन कैसे करें? सही तरीका, खुराक और समय
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Key insights:
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शिलाजीत एक ऐसा अद्वितीय प्राकृतिक पदार्थ है, जो हिमालय और अन्य ऊंचे पर्वतों की गुफाओं और चट्टानों में पाया जाता है। इसका उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता आ रहा है। शिलाजीत में प्राकृतिक फुल्विक एसिड, विभिन्न खनिज और आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर की ऊर्जा बढ़ाने, सहनशक्ति बढ़ाने, और स्वास्थ्य को संवारने में सहायक होते हैं। आज के इस लेख में हम समझेंगे कि शिलाजीत का सेवन कैसे करना चाहिए, इसके लाभ क्या हैं और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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Did You Know?
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शिलाजीत का सेवन कैसे करें?

1. दूध के साथ सेवन
शिलाजीत को दूध के साथ लेने का तरीका बहुत प्रचलित है। एक गिलास गर्म दूध में शिलाजीत की थोड़ी मात्रा मिलाकर सेवन करना बहुत फायदेमंद माना जाता है। दूध के साथ इसे लेना पाचन में भी आसान बनाता है और शरीर इसे जल्दी अवशोषित करता है। इसके अलावा, दूध में शिलाजीत मिलाने से इसकी ताकत बढ़ जाती है और यह लंबे समय तक असर करता है।
2. गुनगुने पानी के साथ
यदि आप दूध नहीं पीते हैं, तो गुनगुने पानी के साथ भी शिलाजीत का सेवन किया जा सकता है। सुबह खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी में शिलाजीत मिलाकर पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और ऊर्जा बढ़ाने में मदद करता है।
3. सामान्य मात्रा और खुराक
शिलाजीत की खुराक व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और ज़रूरतों पर निर्भर करती है। आमतौर पर, शुरुआत में 300-500 मिलीग्राम शिलाजीत का सेवन किया जा सकता है। धीरे-धीरे इसकी मात्रा को 1000 मिलीग्राम तक बढ़ाया जा सकता है। ओवरडोज़ से बचना चाहिए क्योंकि इससे स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। किसी भी सप्लिमेंट की तरह, इसका अधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए हमेशा इसे संतुलित मात्रा में लें।
अपने आहार में शिलाजीत को शामिल करने के दिलचस्प तरीके
शिलाजीत को आहार में शामिल करना काफी आसान है और इसके कई दिलचस्प तरीके हैं। खासकर पुरुषों के लिए, शिलाजीत को रोजमर्रा के खाद्य और पेय में मिलाकर इसके लाभ पाए जा सकते हैं।
- हर सुबह हर्बल चाय या कॉफी में: अपने दिन की शुरुआत एक कप गर्म हर्बल चाय या कॉफी में शिलाजीत मिलाकर करें। इससे आपका पेय अधिक पौष्टिक बनता है और साथ ही ऊर्जा बढ़ाने में भी मदद करता है।
- स्मूदी और जूस के साथ: शिलाजीत को अपनी पसंदीदा स्मूदी या जूस में मिलाकर एक स्वादिष्ट और हेल्दी विकल्प तैयार करें। यह एक ऐसा तरीका है, जिससे आप इसे आसानी से ले सकते हैं और इसे स्वादिष्ट भी बना सकते हैं।
- एनर्जी बार्स में: शिलाजीत को घर में बने एनर्जी बार्स में मिलाकर एक ऐसा स्नैक तैयार करें, जिसे आप दिन में कभी भी खा सकते हैं। ये बार्स आपको तुरंत ऊर्जा देंगे और आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद रहेंगे।
- दही के साथ: शिलाजीत को ताजे दही में मिलाकर खाने से यह एक पौष्टिक स्नैक बन जाता है। इसे आप दिन में कभी भी हल्के-फुल्के नाश्ते के रूप में ले सकते हैं।
इन तरीकों से आप शिलाजीत को अपने रोजमर्रा के खानपान में आसानी से शामिल कर सकते हैं और इसके बेहतरीन फायदे ले सकते हैं।
शिलाजीत लेने का सही तरीका

शिलाजीत का सेवन हमेशा सही मात्रा, सही समय और शुद्ध रूप में करना चाहिए। बिना शुद्ध किए हुए या संदिग्ध शिलाजीत लेने से लाभ के बजाय हानि हो सकती है। इसलिए सेवन शुरू करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
- शुद्ध शिलाजीत ही लें: ऐसा शिलाजीत चुनें जो अच्छी तरह शुद्ध किया गया हो। अशुद्ध शिलाजीत में मिलावट या हानिकारक तत्त्व होने की आशंका रहती है।
- कम मात्रा से शुरुआत करें: यदि आप पहली बार शिलाजीत ले रहे हैं, तो थोड़ी मात्रा से आरम्भ करें। इससे शरीर की सहनशीलता का पता चलता है।
- निर्धारित मात्रा से अधिक न लें: अधिक मात्रा लेने से लाभ जल्दी मिलेगा, यह सोच सही नहीं है। जरूरत से अधिक सेवन करने पर पेट की परेशानी, भारीपन या बेचैनी हो सकती है।
- गुनगुने पानी या दूध के साथ लें: शिलाजीत को हल्के गुनगुने पानी या दूध में मिलाकर लिया जा सकता है। इससे इसे लेना सरल हो जाता है।
- नियमित समय तय करें: रोज अलग-अलग समय पर लेने के बजाय एक निश्चित समय रखें। नियमितता से सेवन करना अधिक उचित माना जाता है।
- यदि पाचन कमजोर है, तो भोजन के बाद लें: जिन लोगों को अम्लता, मितली, पेट में जलन या भारीपन रहता है, वे इसे भोजन के बाद लें।
- शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें: यदि सेवन के बाद सिर भारी लगे, घबराहट हो, पेट खराब हो या असहजता महसूस हो, तो सेवन रोक दें।
- दूसरी औषधियों के साथ सावधानी रखें: यदि आप पहले से किसी रोग की दवा ले रहे हैं, तो शिलाजीत शुरू करने से पहले चिकित्सक से सलाह लें।
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लंबे समय तक लगातार सेवन से पहले सलाह लें: थोड़े समय के लिए सामान्य सेवन अलग बात है, पर लंबे समय तक नियमित सेवन सोच-समझकर करना चाहिए।
सही तरीका वही है जिसमें शिलाजीत शुद्ध हो, मात्रा सीमित हो और सेवन आपके शरीर के अनुकूल हो।
शिलाजीत का सेवन करते समय सावधानियां
1. अधिक सेवन से बचें
शिलाजीत का अधिक मात्रा में सेवन करना हानिकारक हो सकता है। इससे पेट में जलन, उल्टी, और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए इसे उचित मात्रा में ही लेना चाहिए।
2. एलर्जी की जांच
कुछ लोगों को शिलाजीत से एलर्जी हो सकती है, इसलिए पहली बार सेवन करते समय इसे थोड़ा ही लें और अपने शरीर की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। यदि किसी प्रकार की एलर्जी जैसे त्वचा पर खुजली या लाल चकत्ते दिखें, तो इसका सेवन बंद कर दें और डॉक्टर से सलाह लें।
3. दवाओं के साथ परामर्श
यदि आप पहले से किसी अन्य दवा का सेवन कर रहे हैं, तो शिलाजीत लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक है। यह विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण है जब आपको उच्च रक्तचाप, मधुमेह, या हृदय से संबंधित समस्याएं हों।
शिलाजीत का सेवन कब करें?
- सुबह के समय: सुबह खाली पेट शिलाजीत का सेवन करना ऊर्जा और एकाग्रता में सुधार के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। यह पूरे दिन ताजगी का एहसास कराता है।
- रात में सेवन: यदि आप थकान महसूस करते हैं या तनाव से मुक्ति चाहते हैं, तो रात में सोने से पहले शिलाजीत का सेवन किया जा सकता है। इससे शांत नींद में भी मदद मिलती है।
शिलाजीत कब न लें?

हर व्यक्ति के लिए शिलाजीत उपयुक्त नहीं होता। कुछ स्थितियों में इसका सेवन टालना चाहिए, क्योंकि ऐसे समय में यह शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।
- गर्भावस्था में सेवन न करें: इस समय बिना चिकित्सकीय सलाह के शिलाजीत नहीं लेना चाहिए।
- स्तनपान के समय न लें: बच्चे पर प्रभाव को देखते हुए सावधानी जरूरी है।
- यदि आप किसी रोग की दवा ले रहे हैं: विशेष रूप से मधुमेह, रक्तचाप, हृदय, यकृत या गुर्दे से जुड़ी दवाएँ लेने वालों को बिना सलाह सेवन नहीं करना चाहिए।
- यदि आपका रक्तचाप बहुत कम रहता है: ऐसे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
- यदि रक्त से जुड़ी समस्या हो: रक्त पतला होने, रक्तस्राव या थक्का जमने की गड़बड़ी में इसका सेवन टालना चाहिए।
- शल्य-चिकित्सा से पहले: यदि कोई शल्य-चिकित्सा होने वाली है, तो कुछ समय पहले इसका सेवन बंद करना उचित होता है।
- यदि शरीर में पहले से गर्मी, जलन या बेचैनी रहती हो: ऐसे लोगों को बिना सलाह सेवन नहीं करना चाहिए।
- यदि अशुद्ध शिलाजीत हो: संदिग्ध, खुला या भरोसे के बिना शिलाजीत बिल्कुल न लें।
- यदि सेवन के बाद दिक्कत होने लगे: पेट दर्द, मितली, चक्कर, घबराहट या एलर्जी जैसी परेशानी हो तो तुरंत बंद कर दें।
सीधी बात यह है कि शिलाजीत हर किसी के लिए हर समय उपयुक्त नहीं होता। रोग, दवा और शरीर की अवस्था देखकर ही इसका सेवन करना चाहिए।
क्या शिलाजीत खाली पेट लेना चाहिए?
शिलाजीत खाली पेट लिया जा सकता है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए सही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसका निर्णय आपके पाचन, शरीर की प्रकृति और सहनशीलता पर निर्भर करता है।
- यदि आपका पाचन अच्छा है, तो आप इसे खाली पेट ले सकते हैं।
- यदि आपको अम्लता, गैस, जलन या मितली होती है, तो भोजन के बाद लेना अधिक उचित रहेगा।
- पहली बार सेवन कर रहे हैं, तो खाली पेट लेने के बजाय भोजन के बाद शुरुआत करना बेहतर है।
- यदि खाली पेट लेने पर असहजता हो, तो समय बदल दें।
- खाली पेट लेना कोई अनिवार्य नियम नहीं है सबसे जरूरी बात यह है कि शरीर को दिक्कत न हो।
बेहतर तरीका यह हो सकता है:
- पहले कुछ दिन हल्के भोजन के बाद सेवन करें
- शरीर की प्रतिक्रिया देखें
- सब ठीक रहे तो आगे अपनी सुविधा के अनुसार समय तय करें
- यदि खाली पेट लेने पर परेशानी हो, तो उसी विधि को छोड़ दें
अंत में, शिलाजीत खाली पेट लेना जरूरी नहीं है। सही समय वही है जब आपका शरीर उसे आराम से स्वीकार करे और किसी प्रकार की परेशानी न हो।
निष्कर्ष
शिलाजीत एक बहुमूल्य प्राकृतिक पदार्थ है जो यदि सही तरीके और मात्रा में लिया जाए तो स्वास्थ्य के लिए कई फायदे प्रदान करता है। यह शरीर को ऊर्जा, मस्तिष्क को शक्ति, और त्वचा को चमक प्रदान कर सकता है। लेकिन ध्यान रखें कि इसका सेवन हमेशा संतुलित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से ही करें। शिलाजीत का सेवन आपकी दिनचर्या में सकारात्मक बदलाव ला सकता है, बशर्ते इसे सही तरीके से अपनाया जाए।
References
- शिलाजीत हिमालय में मिलने वाला एक प्राकृतिक पदार्थ है, जो फुल्विक एसिड, खनिज और पोषक तत्वों से भरपूर है।(https://www.researchgate.net)
- शिलाजीत नियमित रूप से लेने से शरीर में ऊर्जा, मस्तिष्क की क्षमता, और त्वचा की चमक में सुधार आता है। (https://www.researchgate.net)
- शिलाजीत में फुल्विक एसिड और खनिज होते हैं, जो ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ाते हैं।(https://www.researchgate.net)










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